टटका प्रस्तुति:


आजु देखो जनमे बाले कनहाई..

आजु देखो जनमे बाले कनहाई !!ध्रुव!!
जाके ब्रह्मा पार न पाबै, सो नंदलाल कंहाई !!अंतरा!!

शंकर ध्यान धरत उर अंतर, सपनहु दरस न पाई !
सो यशुदा के पुत्र कहाये, गोपियना गोद खेलाई !!१!!

पल में जो तिहुँपुर उप्जाये, पालना नाश जनाई !
ताके नार छिलत है दगरिना दोउ कर प्राण बचाई !!२!!

नारद शेष शारदा जाके, वेद पुराण सुनाये !
सोहर गावत ताके महरिन, ढ़ोलक ताल बजाये !!३!!

अचरज और कहाँ मैं केते, महरिना दुध पिलाई !
"लक्ष्मीपति" हरि जना के कारण, यदुकुल देह धराई !!४!!

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रे मना मुरख जाग - (प्रातकालीय)

रे मना ! मुरख जाग सवेरे क्यों कायर है सोता है !!ध्रुव!!
राम भजना करि पाइ मनुज तना, क्यों आलस में खोता है !!अंतरा!!

मानुष के तना दुर्लभ जग में, बड़ए भाग से पाता है !
ताको करत खराब नदाना, याही ते दुख पाता है !!१!!

जो भूले इंदिय सुख कारण, सो पीछे पछताता है
चूकेंगे सो भूखे रहि है, आगे यम के नाता है !!२!!

आलस करता ताते पामर, यहाँ वहाँ रोता है !
"लक्ष्मीपति" परचारि कहत है, जगे आनंद है !!३!!

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अपनी बनाई, बनाई बनत नहीं..

अपनी बनाई, बनत नहीं, जाको राम न देत बनाई !!ध्रुव!!

अपने बनावन कारन रावण, सीता लै गई चुराई !
आप मरे, मरि गये सकल कुल, राज विभीषण पाई !!१!!

अपने बनावन कारन कौरव, द्रोपदी चीर छिनाइ !
हारि मरे, पछताइ बंधू मिली, भारत में दुःख पाई !!२!!

अपने बनावन कारन दानव, भस्मासुर बन पाई !
जरि गये माथ, हाथ निज छुबत, महादेव सुख पाई !!३!!

अपने बनावन कारन केते, कोटिन कियो उपाई !
'लक्ष्मीपति’ नहि बने काहू से, झूठे करत बड़ाई !!४!!

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